प्रदेश में आपदा, काँग्रेस - भाजपा सत्ता स्वार्थों में व्यस्त : कॉ.जसविंदर सिंह !

कैलारस : प्रदेश में बे मौसम बरसात और ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। गेहूं, चना, मसूर, सरसों, मटर सहित सब्जियां और फल और फूल की खेती भी बुरी तरह से बर्बाद हो रही है। तब प्रमुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी किसानों तथा ग्रामीणों की चिंता करने की अपेक्षा सत्ता हथियाने की साजिशों में व्यस्त है। आपदा की इस घड़ी में वे किसानों को बेसहारा छोड़ कर चोर दरवाजे से सत्ता पाने की तिकड़बाजी में लगी हुई है।यह बात माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कैलारस में पार्टी जिला समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कही। प्रशासन पर पकड़ हुई ढीली:- सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने अपने विधायकों को बचाने और दूसरे पक्ष के विधायकों को ललचाने में व्यस्त हैं, इसलिएजाहिरसी बात है कि ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात का शिकार हुये किसानों का समय पर सर्वे कर उन्हें तुरुंत राहत देने और मुआवजा देने के लिए प्रशासन पर कसावट ढीली हुई है। इसके लिए भलें ही दोनो पक्ष एक दूसरे को दोषी ठहरायें मगर दोनो हीअपनी अपनी जुम्मेदारियाँ हैं कि वह प्रशासन की पकड़ सही तरह से रखें ,जिससे प्राकृतिक आपदा में हुये किसानों के नुकसान का समय रहते सर्वे हो सके।भाजपा की सत्ता भूख हुई बेनकाब:- माकपा राज्य सचिव ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में भाजपा की सत्ता की भूख इस कद्र बेनकाब हुई है किे वे जनादेश को भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है। भाजपा को यदि लगता है कि कमलनाथ सरकार सदन का विश्वास खो चुकी है तो उसे विधायकों का अपहरण कर चार्टर विमानों से महंगे होटलों और रिसोर्ट में ठहराने और करोड़ों का लालच देने की बजाय विधान सभा में अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए। वैसे भी जब विधान सभा के बजट सत्र शुरू होने वाला है तो बजट सत्र पर वोट ही यह साबित कर देता कि सरकार को सदन का विश्वास है या नहीं। भाजपा का सदन में नहीं हॉर्स राइडिंग में भरोसा:-जसविंदर सिंह के अनुसार यदि जनता के मूड को भांपना चाहती है तो शीघ्र ही प्रदेश में विधान सभा के दो उपचुनाव होने वाले हैं, जहां पक्ष और विपक्ष जनता की अदालत में जाकर इसे भी टेस्ट कर सकते हैं। मगर विधान सभा और जन अदालत के दोनो ही विकल्पों को दरकिनार भाजपा न केवल विधायकों की खरीद फरोख्त में लगी है, बल्कि खुले-आम कह रही है कि सत्ता पक्ष के बीस विधायक उसके कब्जे में हैं। विपक्ष द्वारा तैयार यह परिस्थितियां सरकार के बने रहने या जाने की स्थिति में भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देंगी। साफ है कि भाजपा सदन में जन मुद्दे उठाने की बजाय भ्रष्टाचार की 15 साल की संस्कृति को ही बना ये रखना चाहती है।सिद्धांत विहीन राजनीति का हल सिर्फ वामपंथ:-मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि इस सिद्वांतहीन राजनीति का विकल्प है तो वह है केवल केवल वामपंथ ! वर्ष 2011 में जब केरल में वामपंथी जनवादी मोर्चा सत्ता से केवल एक सीट से पीछे रह गया था, जबकि उसने तीन सीटें केवल पांच सौ से भी कम के अंतर से हारी थीं, तब विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे को दो विधायकों ने माकपा की सरकार को समर्थन देने की पेशकश की थी, लेकिन वामपंथी दलों ने नैतिकता के आधार पर समर्थन लेने मना कर दिया था। इधर भाजपा उन विधायकों को करोड़ों का लालच देकर गले लगा रही है, जो भाजपा को हरा कर जीते हैं। प्रदेश में आपदा से राहत दिलाने की माँग:-माकपा ने इस अनैतिक खेल रोकने और प्राकृतिक आपदा में फंसे प्रदेेश को राहत दिलाने को प्राथमिकता पर लाने की मांग की है। संकल्प दिवस मनाने का निर्णय:- बैठक में 23 मार्च को शहादत दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाने की योजना बनाई गई । बैठक की अध्यक्षता महेश प्रजापति ने की। जिला सचिव गयाराम सिंह धाकड ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। सचिव मंडल सदस्य अशोक तिवारी और राज्य समिति सदस्य मुरारी लाल धाकड भी बैठक में उपस्थित थे ।