सड़क खराब होने के कारण जिम्मेदार एजेंसियों पर होगा केस दर्ज !

दिल्ली: भारतीय दंड संहिता के तहत सड़कों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसियों पर खराब सड़क होने के कारण होने वाली मौत के लिए केस दर्ज होगा।इस परिधि में सड़कों पर गड्ढे और दोषपूर्ण डिजाइन के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के मामले को शामिल किया जाएगा।बताया जा रहा है कि मंत्रालय ने इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया है, हालांकि दंड कितना होना चाहिए, इसको अभी तय नहीं किया गया है। मंत्रालय ने शराब के नशे में वाहन चलाने, जिसके कारण मौतें होती हैं, उसे आईपीसी के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला मानना स्वीकार किया है। ऐसे मामलों को हत्या के जुर्म में नहीं रखा जाएगा, जिसमें 10 साल की जेल की सजा या आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है।वर्तमान में, नशे में मौत के कारण चालकों पर आईपीसी की धारा 304A के तहत केस दर्ज किया जाता है, जिसमें दो साल की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा मिलती है। भारत में सड़क दुर्घटनाओं पर सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 में सड़क पर गड्ढे, स्पीड ब्रेकर, सड़कों के निर्माण या मरम्मत के कारण 10,727 लोगों की मौत हुई थी।संसदीय समिति ने कहा कि लोकसभा में पेश किए गए विधेयक में सड़कों के दोषपूर्ण डिजाइन और खराब रखरखाव के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के मामले को शामिल नहीं किया गया था। पूर्व मंत्री गोपीनाथ मुंडे की मौत के बाद मंत्रालय ने सड़क परिवहन सुरक्षा विधेयक का मसौदा तैयार किया है। इसमें उन एजेंसियों पर 10 लाख रुपए प्रति व्यक्ति की मौत या दिव्यांग होने पर जुर्माने लगाए जाने का प्रावधान किया गया है, जिनकी खराब डिजाइन के कारण हादसे होते हैं।इस धारा को मोटर वाहन संशोधन विधेयक में शामिल किया जाएगा। परिवहन संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने दोषपूर्ण सड़क डिजाइन, निर्माण और रखरखाव के लिए जवाबदेह ठेकेदारों और एजेंसियों पर दंड के प्रावधान की सिफारिश विधेयक में की है।