राजनीति और इसमें बढ़ता बाबाओं का बोलबाला !

अशोकनगर /चंडीग़ढ  : हरियाणा का सिसा स्थित डेरा सच्चा सौदा देश की राजधानी दिल्ली से 240 किमी. दूर है, जो कि सात सौ एकड़ के दायरे में फैला है, जहां फ्री में इलाज और शिक्षा दी जाती है। बाबा की फिल्म एमएसजी रिलीज हुई, जिसमें भगवान का संदेश बताते हुए उसने आर्गेनिक खाना खाने और नशे दूर रहने की नसीहत दी है। दो साध्वियों के यौन शोषण के दोषी करार दिए जाने से एक दिन पहले तक स्वघोषित आध्यात्मिक गुरु गुरमीत राम रहीम अपना एक माह लंबा जन्मदिन मना रहा था, गुरमीत राम रहीम सिंह ने 15 अगस्त 2017 को पचास साल पूरे किए थे, उसके जन्मदिन में राजनीतिक जगत के कई दिग्गज पुहंचे। राम रहीम को दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराए जाने के बाद हुई हिंसक वारदातों में 38 लोगों की मौत हो गई। स्वघोषित बाबा और विवादित धर्मगुरु का आधुनिक भारत में तेजी से रुतबा बढ़ रहा था। फिल्म कलाकार, गायक और धार्मिक नेता के रूप में उत्तर भारत के गरीब तबके में उसके भारी संख्या में समर्थक हैं। रामरहीम को सीबीआई की अदालत की ओर से 20 वर्ष की सजा दी गई।कमजोर इच्छा सकती एवं अंध विश्वास का खेल :-बाबा राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद जिस तरह से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में लोगों ने जमकर बवाल किया और आगजनी की, उसके बाद ये प्रश्न उठना स्वभाविक है कि कैसे कोई व्यक्ति एकाएक इतना प्रभावशालीऔर ताकतवर हो जाता है। दरअसल, इस बारे में यह बात प्रमुख रूप से देखने सुनने में हमेशा से आती है कि भारत में धर्म कीअपनी एक अलग प्रकार से ;विशेष भूमिका है। यहां धर्म की चर्चा कर लोगों को आसानी से अपनी तरफ आकर्षित किया जा सकता है। इसमें इन तथाकथित धार्मिक गुरूओं की भी अपनी भूमिका है।वहीं कमजोर इच्छा सकती एवं अंध विश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि थोड़े से बहकावे में आम लोगों के साथ साथ आसानी से प्रभावशाली लोग भी आ जाते हैं। परन्तु समस्या तब होती है जब वे खुद तथा इनके अंध भगत इन तथाकथितों को भगवान के रूप में पेश करने लगते हैं। लोगों को सही मार्ग दिखाने के नाम पर गुमराह करते हुए तमाम तरहकी लच्छेदार बातों में फसा अनेकों प्रकार से शारीरिक मानसिक शोषण करना आरम्भ कर देते हैं। बाबाओं का भारत में लंबा इतिहास रहा है। यह लोग खुद को भगवान के दूत बताते हैं।अधिकांशतः गुरु अपने समर्थकों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं और समाज के गरीब लोगों को साथ रखकर उनमें आशा का संचार करते हैं। हालांकि गुरुओं की नई पीढ़ी कम तपस्वी और अधिक शक्तिशाली होती है और इनके पास समर्थकों का बड़ा हुजूम होता है। राम रहीम के समर्थक उसके लिए जान देने के लिए तैयार रहते हैं, हालांकि आलोचक कहते हैं कि समर्थकों का ब्रेन वॉश किया गया है। राम रहीम को सजा सुनाए जाने से पहले सामान्य व्यक्ति से लेकरबड़ी -बड़ी प्रसिद्ध हस्तियॉं जिनमेंं खेल,राजनीति तथा व्यापार जगत की जाने -माने विशिष्ठ जन शामिल रहे हैं जो अक्सर डेरे पर हाज़िरी लगाने आते रहते थे। बाबा के लगभग 2.5 मिलियन अनुयायी बताए जा रहे हैं।राजनीति में बढ़ता बाबाओं का प्रभाव :- राम रहीम के 50वें जन्मदिन के मौके पर 15 अगस्त को हरियाणा भाजपा के कई नेता शामिल हुए। एक नेता की ओर से 5.1 मिलियन रुपये खेल सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए दिए गए। राम रहीम के टीवी नेटवर्क पर प्रसारित इस वीडियों से इसकी जानकारी मिली। गुरु के वकील की तरफ से कहा गया कि राम रहीम की रिहाई के लिए आगे पैरवी की जाएगी। हालांकि इस घटना के बाद बाबा का सपोर्ट बेस कम हो रहा है।परन्तु कई लोग उसे अभी भी भगवान मान रहे हैं।आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर जो नार्थ अमेरिका के साथ भारत में भी चर्चित एवं प्रचलितनाम बन गया हैं। दूसरी तरफ योग के नाम से अपनी दुकानदारी शुरू करने वाले तथा पतंजलि उत्पादों के बाबा से बने व्यापारी रामदेव का दिनों दिन राजनीति से लगाकर चारों ओर बहुततेजी से प्रभाव बढ़ता जा रहा हैं। राजनेताओं की ओर से गुरुओं के सहारे चुनाव जीते जाते हैं।यही हमारे देश की विडंबना है कि देश में सरकारों एवं राजनीति का संचालन बाबाओं के मठों और डेरों से हो रहा है। वह दिन दूर नहीं अब देश में जन चेतना का विकास हो रहा है। आमजन इन तमाम ढोंगी -पाखंडियों के साथ ही इनके चरण चूमने वालों को उनके उचित स्थान पर पहुंचाएंगे।