मच्छर काटने से नहीं होगा डेंगू !

 

जबलपुर: देश में से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया को पूरी तरह से खत्म करने भारत सरकार ने 2027 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए जबलपुर के आईसीएमआर(इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के एनआईआरटीएच(सेंटर नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ) में अनुसंधान आरम्भ हो गया है।व्हूलबाकिया पर चल रहा काम:-इस सेंटर पर जो कार्य किया जा रहा है उसकी प्रमुख विशेषता यह है कि यहां एक ऐसे बैक्टीरियापर शोध किया जा रहा है जिसका नाम व्हूलबाकिया है, जो मच्छरों के भीतर ही डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया के परजीवी(पैरासाइट) को निष्क्रिय कर देगा। अर्थात शोध के उपरांत देश में मच्छर तो रहेंगे तथा काटेंगे भी किन्तु इनके काटने से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया नहीं फैलासकेंगा।एनआईआरटीएच के डायरेक्टर डॉ. ए.दास का कहना है कि देश में प्रथम बार दो करोड़ रूपए की लागत से इतना बड़ा विशेष पिंजरा(कैज) बनाया जा रहा है।शोध से तैयार की जाएगी व्हूलबाकिया बैक्टीरिया की फौज :- व्हूलबाकिया बैक्टीरिया दीमक (टरमाइट) और सिरसा मक्खी (ड्रोसोफिला) में पाया जाता है। जिनमें से माइक्रो लैब में माइक्रो इंजेक्शन के माध्यम से बैक्टीरिया को मच्छरों के सेल में प्रवाहित किया जाएगा।जो मच्छरों के संसर्ग और नए मच्छरों के जीन में आ जाएगा बैक्टीरिया पैदा होने वाले मच्छरों में इस बैक्टीरिया की चैन बनती जाएगी, जिससे मच्छर तो रहेंगे परन्तु उनमें डेंगू-मलेरिया-चिकिनगुनिया के पैरासाइट खत्म हो जाएंगे।इसके लिए एक एकड़ में एल्युमीनियम की मच्छरदानीनुमा डोम बनाया जाएगा। इसमें व्हूलबाकिया बैक्टीरिया से लैस मच्छर और डेंगू, चिकिनगुनिया फैलाने वाली मादा एडीज और मलेरिया फैलाने वाली मादा एनाफिलीज मच्छरों की बराबर संख्या छोड़ी जाएगी। कैज में हरियाली, झरना, खून, गाय, भैंस होंगे ताकि मच्छर पैरासाइट और बैक्टीरिया उनमें प्रवाहित करते रहें। व्हूलबाकिया बैक्टीरिया लैस मच्छरों की फौज तैयार होने के बाद इन्हें छोटे-छोटे गांव में छोड़ने से शुरुआत की जाएगी।व्हूलबाकिया बैक्टीरिया दीमक (टरमाइट) और सिरसा मक्खी (ड्रोसोफिला) में पाया जाता है। जिनमें से माइक्रो लैब में माइक्रो इंजेक्शन के माध्यम से बैक्टीरिया को मच्छरों के सेल में प्रवाहित किया जाएगा।जो मच्छरों के संसर्ग और नए मच्छरों के जीन में आ जाएगा बैक्टीरिया पैदा होने वाले मच्छरों में इस बैक्टीरिया की चैन बनती जाएगी, जिससे मच्छर तो रहेंगे परन्तु उनमें डेंगू-मलेरिया-चिकिनगुनिया के पैरासाइट खत्म हो जाएंगे।डॉ. अपरूप दास, डायरेक्टर, एनआईआरटीएच :-डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के पैरासाइट निष्क्रिय करने की रिसर्च के लिए एनआईआरटीएच जबलपुर का चयन हुआ है। अगले साल तक कैज तैयार होने के बाद रिसर्च शुरू हो जाएगी। रिसर्च की सफलता से ही तय होगा कि देश में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया पर कब तक काबू पा सकेंगे। संभव है कि 2027 से पहले ही देश में इन बीमारियों पर काबू पाया जा सके।ऑस्ट्रेलिया से व्हूलबाकिया बैक्टीरिया लाने एमओयू साइन :-जांबिया और तंजानिया में ऐसे ही कैज हैं। दक्षिण अफ्रिका में भी इसका उपयोग किया जा रहा है।ऑस्ट्रेलिया की मोनास यूनिवर्सिटी के साथ व्हूलबाकिया बैक्टीरिया युक्त मच्छर को लाने एमओयू साइन किया जा रहा है।