संतुलित आहार की कमी से कमजोर होता इम्यूनसिस्टम - डॉ.संधु

जिले में स्‍वाईन फ्लू, डेगू, मलेरिया उपचार एवं बचाव तथा लोगों का जागरूक करने हेतु बुधवार शाम को मीडिया कार्यशाला का आयोजन स्‍थानीय मंगल होटल में किया गया। संतुलित आहार की कमी एवं नशा की प्रवृति उस पर चारों तरफ फैले अस्वच्छता के साम्राज्य से कमजोर ही नहीं होता इम्यूनसिस्टम बल्कि अनेकों साध्य और असाध्य रोगों से असमय जकड़ा जाता है आदमी।उसपर उत्प्रेरक का कार्य करते है मिलावटी एवं दूषित खाद्य पदार्थ।मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए जान जागृति जरुरी :-इस अवसर पर इलेक्‍ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया जिला ब्‍यूरो एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे।कार्यशाला में मुख्‍यचिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी डॉ.आर.पी. सरल ने कहा कि जिले में मौसमी बीमारियों से बचाव हेतु समाज को जागरूक करने के लिए मीडिया की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। उन्‍होंने कहा कि जानकारी बचाव है। स्‍वाईन फ्लू से घबराए नहीं बल्‍की सतर्क रहे।मलेरिया से बचने हेतु घरों में मच्‍छरदानी का इस्‍तमाल करें। शाम के समय घरों में नीम की पत्‍ती का धुआं करें। बुखार आने पर नजदीकी स्‍वस्‍थ्‍यकेन्‍द्र पर खून की जांच कराए। उन्‍होंने कहा कि डेंगू से सावधानी जरूरी है। विलम्‍ब और लापरवाही डेंगू को जानलेवा बना सकती है। यह डेन नामक वायरस के कारण होता है जो मच्‍छर के काटने से फैलता है। स्‍वाइन फ्लू से बचाव भीड़भाड़ में न जाएं :- इस अवसर पर डॉ. डी.के. जैन ने स्‍वाईन फ्लू के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इससे बचाव के प्रति मीडिया के सहयोग से जन जागरूकता लाना आवश्‍यक है। जो स्‍वाइन फ्लू से पीडि़त है उससे हाथ ना मिला जाए। यह एक संक्रामक रोग है। पांच वर्ष से छोटे बच्‍चों को, गर्भवति माताओ को, 65 वर्ष से अधिक वाले व्‍यक्तियों एवं फैफड़े, लीवर, गुर्दे, मधुमेह, कैंसर,एच.आई.व्‍ही.आदि बीमारियों से ग्रसित लोगों को इस बीमारी से संक्रमण का खतरा रहता है। स्‍वाइन फ्लू से बचाव हेतु सर्दी खासी वाले मरीजों से दूर रहे और उनसे हाथ ना मिलाए, भीड़वाली जगहों से जाने से बचें। खांसते तथा छीकते समय मुंह पर रूमाल रखे। भोजन से पहले हाथ साबुन से अच्‍छी तरह से धोएं। उन्‍होंने बताया कि स्‍वाइन फ्लू से पीडि़त मरीज की जांच एवं उपचार जिला चिकित्‍सालय में किए जाने की व्‍यवस्‍था की गई है। समस्‍त जांचे एवं उपचार नि:शुल्‍क किया जाता है। मच्‍छर के काटने से फैलता मलेरिया :-जिला मलेरिया अधिकारी श्रीमती डॉ. दीपा गंगेले ने बताया कि मलेरिया मच्‍छर के काटने से फैलता है। यह मच्‍छर घरों में साफ पानी से भरे कटेनर, अंडर ग्राउड टेंक, बैरल, टायर, सीमेंट की टंकियां, कूलर, घर की छतों पर अनुउपयोगी सामान में भरें पानी में पैदा होता है। उन्‍होंने बताया कि मलेरिया के लक्षण ठण्‍ड लगकर बुखार आना एवं पसीना होकर बुखार उतरना तथा एक दिन छोड़कर बुखार आना है। ऐसे लक्षण पाए जाने पर नजदीकी स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर रेपिड डायग्‍नोस्टिक किट के माध्‍यम से नि:शुल्‍क खून की जांच कराए और रिपोर्ट पाएं।मलेरिया का सीजन फरवरी अंतिम सप्ताह से सितम्बर :-इस स्वास्थ्य विभाग की कार्यशाला में यह तो बताया की जांचें कराये कैसे और कब मलेरिया का सीजन हमारे देश और राज्य में फैलता है,जब इसके सम्बन्ध में कोई स्पष्ट बात पूछने पर सामने नहीं आई तब मीडिया कर्मियों के बीच से ही डॉ.डी.एस.संधु को आमंत्रित किया गया जिसके सम्बन्ध में आपने बताया कि देश में मलेरिया के प्रकोप का सीजन फरवरी अंतिम सप्ताह से शुरू होकर सितम्बर तक रहता है।क्योंकि इसी दौरान जलाशयों का पानी वाष्प बनकर हवा में मिल जाता है और यही पानी श्वसनक्रिया द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। किन्तु जिन लोगों के शरीर में सोडियम सल्फ़ेट की कमी के चलते प्रतिरोधक शक्ति कम होने से यह शरीर में जमा हो जाता है और जब यह शरीर से बहार नहीं निकल पाता है, तब शरीर में जोरों की कंपकपी होती है और का तापमान अधिक हो जाता है । फिर कुछ घंटों बाद शरीर से पसीना आना शुरू हो जाता है और तापमान सामान्य हो जाता है। इस प्रकार किसी को यह 12 से 24 घंटों में किसी को दो से तीन दिन बाद यही प्रक्रिया होती है। यदि रोगी को सोडियम सल्फेट की चाँद खुराकें मिल जाए तो फिर उसे यह दिक्कत नहीं होगी।इस लिए आवश्यक है कि जिन लोगों को बार बार किसी प्रकार का ज्वर आता है उसकी प्रतिरोधक क्षमताओं का विकास किया जाए तथा किसी भी प्रकार के नशाखोरी से दूर रखा जाये। हमारे शरीर में सोडियम सल्फेट और सोडियम क्लोराइड का अत्यंत महत्त्व पूर्ण कार्य है। सल्फेट जहां हमारे शरीर से अवांछित पानी को बाहर निकल ने का कार्य करता है, वहीं क्लोराइड पानी को ही शरीर के अंदर उपयोगी बना कर शरीर में संरक्षित करता है। इन दोनों की कमियों के चलते हमारा शरीर विभिन्न प्रकार की परेशानियों का शिकार हो जाता है। अतः साथियो ऐसी स्थिति में घबराने की नहीं उचित धैर्य की आवश्यकता होती है। यह स्थिति न बने इसके लिए हम स्वंय एवं अपने लोगों को संतुलित आहार लेने की आदत अपनाएं, वहीं अपने आसपास गंदगी न होने दें।कार्यशाला में दीपक सिसोदिया द्वारा मौसमी बीमारियों से बचाव के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन यशवंत सिंह रघुवंशी द्वारा तथा आभार प्रदर्शन जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. एल.डी.एस.फूंकवाल द्वारा किया गया।