पटाखे जलाने के बाद हाथों को नहीं धोने से हो सकते हैं गंभीर रोग - डॉ.डी.एस.संधु

अशोकनगर :आज देश में चारों तरफ दीपावली की धूमधाम मची हुई है। बड़ों से लगाकर युवक और बच्चे अपने -अपने तरह से इस त्यौहार को मानाने के लिए उत्साहित हैं। इस अवसर पर कुछ लोग इतने अधिक उतावले हो जाते हैं की उनको अपने आप का भी ध्यान नहीं रहता है। उस पर से आतिशबाजी का नाना प्रकार से उपयोग करना न सिर्फ प्रदूषण, बल्कि हमारे शरीर को भी कितने नुकसान पहुँचाता है। शायद जो लोग पटाखे जलाते हैं उन्हें यह नहीं पता कि कैंसर जैसे गंभीर रोग तक होने की भी संभावना बनती हैं ।आतिशबाजी में होते खतरनाक रसायन :- पटाखों में जहरीला कैमिकल होता है, जो पटाखे जलाते समय हाथों पर लगा रह जाता है। यह देखा गया है कि अधिकांशः लोग अपने हाथ अच्छे से साफ न करते हुए कपड़े से पोंछ लेते हैं और इसके पश्चात् भोजन करते हैं। यह देखने में अक्सर आता है कि बच्चे और युवा अधिकतर लापरवाह होते हैं। और उनकी इस लापरवाही के चलते भोजन के साथ हाथ में लगा यह जहरीला पदार्थ शरीर के अंदर पहुंच जाता है। अस्थमा मरीज दिन में मास्क पहनकर घर से निकलें और रात में कहीं भी नहीं जाएं।डॉ.डी.एस.संधु के अनुसार स्वास एवं दमा के रोगी अपने पास हर पल इनहेलर आवश्यक रूप से रखें। साथ ही लोगों को पटाखों के धुँआ से बचते हुए समय पर संतुलित भोजन करने का भी ध्यान रखना चाहिए। प्रदूषण और श्वास के मरीजों की होती वृद्धि :-प्रति वर्ष पटाखों और प्रदूषण के कारण श्वास के मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। देश की अधिकांश घनी बस्तिओं में कई बार यह भी देखने में आता है कि दीपावली की रात्रि में ही मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ता है। इस का प्रमुख कारण है वायु प्रदूषण के चलते श्वांस लेने में परेशानी होना तथा आर्थरायटिस के रोगियों का भी बढ़ना पाया जाता है। मेरी तो यही सलाह है कि जिन लोगों को आर्थरायटिस की शिकायत है, वे दीपावली के अवसर पर विशेष रूप से सतर्कता बरतें और अपने चिकित्सक के संपर्क में बने रहें। सावधानी पूर्वक करें आतिशबाजी:- डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रदूषण की सूची में है भारत, 7वें नंबर पर है। लगभग 75 प्रतिशत बच्चे व युवा होते हैं पटाखों से प्रभावित।वहीं 90 फीसदी मामलों में 10 वर्ष तक के बच्चे पटाखों के कारण जलने का शिकार होते हैं। प्रदूषण लोगों की हड्डियों तक को खोखला कर देता है। इसलिए पटाखे जलाते समय अपने पास पानी से भरी बाल्टी अवश्य रखें। मोमबत्ती से फुलझड़ी या पटाखे जलाएं।जेब या हाथ में पटाखे न रखें। आतिशबाजी समतल एरिया में करें और जलने पर हल्दी और दूध मिश्रित कर पेस्ट लगाएं। टूथपेस्ट या पेन की इंक भी जलने पर लगा सकते हैं और तत्काल नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर के पास लेकर पहुंचें।डब्ल्यूएचओ ने एलर्ट जारी करते हुए बताया है कि प्रति वर्ष 6 लाख से अधिक लोगों की मौतहोती है।