मानवीय संवेदनाओं से परे अजीब परम्पराएँ !

दिल्ली : आज हम आपको मानवीय संवेदना विचलित करने वाले कुछ ऐसे अजीब रीति रिवाजों की जानकारियों को रु-ब-रु करवा रहे हैं, जो कि विश्व के विभिन्न भागो में मनाई जाती है। यूँ तो विश्व में कितने ही अलग-अलग संप्रदाय, धर्म और संस्कृति को मानने वाले लोग हैं। सभी धर्मों में अपने-अपने रीति रिवाज भी होते हैं।बच्ची को ऊपर उछालना :-कर्नाटक के कुछ भागों में आज भी यह विवादित परंपरा को मनाया जाता है। इसमें 2 वर्ष से छोटी लड़की को लगभग 30 फीट की उंचाई से मंदिर के गुंबद तक उछाला जाता है। इसके बाद एक कंबल की मदद से लड़की को नीचे खड़े लोगों के द्वारा पकड़ लिया जाता है। हालांकि लड़की को सुरक्षित रोक लिया जाता है लेकिन उम्र को देखकर ऐसा करना खतरे से खाली नहीं है।मृतक के केश:- चीन के मिआओ जनजाति में यह परंपरा बहुत ही अजीब प्रकार से मनाई जाती है। इस जनजाति में अब केवल 5000 लोग ही शेष बचे हैं। इसके बाद भी यह अपने परंपराओं को मनाने में कोई कोताही नहीं करते हैं। इस अलौकिक परंपरा में यह जनजाति मरे हुए लोगों के केशों को उनके शरीर से निकाल कर उससे विग की बुनाई की जाती है। इसके अलावा भी इस जनजाति की महिलाएं बालों में कंघी करते समय निकले बालों को भी संभालकर रखती हैं और इसकी सहायता से विग का निर्माण करती हैं।पूर्वजों के बालों से बनाए गये इस विग को विशेष त्योहारों के मौके पर श्रृंगार के रूप में पहना जाता है। हालांकि इस जनजाति में पुरुषों से अधिक महिलाओं के बालों का विग मिलता है। क्योंकि उनके बाल अधिक होते हैं।विवाह के लिए अपहरण:-यह एक अजीब परंपरा किर्गिस्तान, मोल्दोवा और चेचन्या जैसे क्षेत्रों में अभी भी जारी है। इस परंपरा में जो भी व्यक्ति किसी लड़की से विवाह करना चाहता है वह अपने मित्रों की मदद से उक्त लड़की का अपहरण कर लेता है। वहां इसे कोई अपराध नहीं समझा जाता है क्योंकि इस परंपरा के अनुसार अपहरण के बाद लड़के तथा लड़की के परिवार के लोग इस विवाह को संपन्न कराते हैं। यह यहां की एक सामान्य परंपरा है जो वर्षों से चली आ रही है।मृत शरीर के पास नृत्य :-आज भी दुनिया से अलग ही मेडागास्‍कर में एक अजीब तरह का रिवाज प्रचलितहै। आदमी के मरने के बाद मेडागास्‍कर में त्‍योहार जैसा माहौल होता है। यहां के परिवार एक अजीब रस्‍म टर्निग ऑफ द बोन्स(फामाडिहाना) मनाते हैं। इस रस्‍म में लोग कब्र से लाश को फिर से निकाल उनकी शव यात्रा निकालते हैं। इस दौरान नए कपड़े पहने जाते हैं। शव को भी एक नए साफ कपड़े में लपेटते हैं और फिर उसके साथ ही नाचते-गाते हैं। नाच-गाने के लिए तेज संगीत भी बजाया जाता है। जानवरों की बलि दी जाती है और मेहमानों एवं परिवारजनों के बीच मांसाहारी भोजन बांटा जाता है।मृतकों की राख खाना:-अमेजन वर्षावन में रहने वाले योनोमी जनजाति द्वारा मृतकों की राख खाने की यह अजीब परंपरा उनका विश्वास है कि यह आत्मा समुदाय में किसी व्यक्ति की मृत्यु का बदला लेने के लिए आती है। इसलिए, मृतक के समुदाय में प्रियजनों का अंतिम संस्कार से 30 से 45 दिनों के पश्चात्ए क समारोह का आयोजन किया जाता है। जिसमें सभी रिश्तेदार उनके अस्थियों से बने सूप में मृतक की राख डालकर पीना पड़ता है।आग में चलना:-चीन में शादी को लेकर एक अजीब और अलग ही परंपरा है। यहां पर नई दुल्हन को घर में प्रवेश कराने से पहले दूल्हे को उसे अपनी गोद या पीठ पर बिठाकर दहकते अंगारों से होकर गुजरना होता है।अंगारों पर नंगे पांव चलने के पीछे का कारण भी काफी हैरान करने वाला है। ऐसा माना जाता है कि दुल्हन के प्रेग्नेंट होने के बाद उसे प्रसव पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है।अंगुलियां काटना :-इंडोनेशिया के पापुआ गिनी द्वीप में रहने वाली दानी प्रजाति के लोग एक अजीब परंपरा निभाते आए हैं। इसके तहत परिवार के मुखिया की मौत होने पर परिवार से जुड़ी सभी महिलाओं की अंगुलियां काट दी जाती है। लोगों का मानना है कि इससे मरने वाले की आत्‍मा को शांति मिलती है।हाथों को रस्‍सी से बांधकर कुल्‍हाड़ी से काटा जाता है। हालांकि सरकार ने इस प्रथा पर रोक लगा दी है लेकिन यह काम अभी भी किया जा रहा है।लाश के साथ रहना :-अपने परिवार के किसी सदस्य की मौत के बाद इंडिनेशिया का एक समुदाय शव को नहीं दफनाते, बल्कि उसे अपने साथ ही रखते हैं या फिर इन्हें ताबूत में डालकर गुफाओं में रखते हैं या फिर पहाड़ियों पर टांग देते हैं।लोग समय-समय पर कब्र से शवों को बाहर भी निकालते हैं। उन्हें नहलाकर साफ-सुथरा करते हैं और नए कपड़े पहनाते हैं। इस दौरान गांव में इनका जुलूस भी निकाला जाता है।स्ट्रिप डांसर्स:-ताइवान में अंतिम संस्कार के मौके पर स्ट्रिप डांसर्स को बुलाने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इससे भटकती आत्मा को शांति मिलती है। इसी तरह चीन में मृतक के सम्मान में ये स्ट्रिप डांसर्स बुलाई जाती हैं।
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