ट्रंप के पोस्टर जलाने के साथ भड़की हिंसा !

लंदन: यरुशलम को राजधानी बनाने के इजरायल के दावे पर मुहर लगाने वाले फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा विरोध होने लगा है। ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ हिंसा की आग भड़कने लगी है। मुस्लिम जगत, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय यूनियन ही नहीं अमेरिका के हर फैसले में साथ रहने वाले ब्रिटेन और सऊदी अरब के सुर भी बदले हुए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि वह यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देंगे। आज यानी 6 दिसंबर को ट्रंप अपना यह वादा पूरा करने जा रहे हैं।क्या है विवाद...:-फिलिस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह कदम उठाने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इजराइल और फलस्तीन के बीच विवाद में यरुशलम का दर्जा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। जानते हैं दोनों देशों के लिए यरुशलम क्यों है अहम और इसे लेकर क्या है विवाद...अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देना एक ऐतिहासिक और वास्तविक है। इजरायल की ज्यादातर सरकारी एजेंसियां और पार्लियामेंट तेलअवीव के बजाय येरूशलम में ही हैं, जबकि अमेरिका और अन्य देशों के दूतावास तेल अवीव में हैं। तेल अवीव में 86 देशों के दूतावास हैं।धार्मिक महत्व:-यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों ही धर्म के लोग यरुशलम को पवित्र मानते हैं। यहां टेंपल माउंट है, जो यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल है। वहीं अल-अक्सा मस्जिद को मुसलमान पवित्र मानते हैं। उनकी मान्यता है कि अल-अक्सा मस्जिद से ही पैगंबर मोहम्मद जन्नत पहुंचे थे। इसके अलावा ईसाई मानते हैं कि यरुशलम में ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। यहां स्थित सपुखर चर्च को ईसाई पवित्र मानते हैं।यरुशलम पर दावा:-एक तरफ जहां इजरायल अपनी राजधानी यरुशलम को बताता है, वहीं दूसरी तरफ फिलिस्तीनी भी इस पर अपना दावा करता है। संयुक्त राष्ट्र सहित दुनिया के कई देश पूरे यरुशलम पर इजरायल के दावे को मान्यता नहीं देते। साल 1948 में इजरायल ने आजादी की घोषणा की थी और एक साल बाद यरुशलम का बंटवारा हुआ था। बाद में 1967 में इजरायल ने 6 दिनों तक चले युद्ध के बाद पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया था।दुनियाभर के नेताओं गहरी की चिंता:-तेल अवीव स्थित अमेरिकी दूतावास को यरुशलम शिफ्ट किए जाने की ट्रंप की योजना से फिलिस्तीनियों में नाराजगी है। फिलिस्तीन के कई समूहों ने ट्रंप के इस कदम का विरोध करने और प्रदर्शन करने की धमकी दी है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ऐसा करता है तो इससे क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ जाएगी। कई देशों ने भी ट्रंप से अपील की है कि वह इस तरह का ऐलान न करें।'गंभीर परिणाम' की चेतावनी दी:- फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने भी यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के ट्रंप के फैसले पर चिंता जताई है। कुछ अरब और मुस्लिम देश भी इस मामले में अपना विरोध जता चुके हैं। अरब लीग के मुखिया, तुर्की, जॉर्डन और फ़लस्तीनी नेताओं ने इसके 'गंभीर परिणाम' की चेतावनी दी है।इससे कट्टरपंथ और हिंसा को मिलेगा बढ़ावा :-येरूशलम में पवित्र इस्लामिक धर्म स्थल के संरक्षक जॉर्डन ने चेतावनी दी है कि अगर ट्रंप आगे बढ़ते हैं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उसने प्रमुख क्षेत्रीय और अरब लीग और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक कॉन्फ्रेंस की एक आपात बैठक बुलाई है। अरब लीग के मुखिया अबुल गेथ ने चेतावनी दी है कि इस तरह के कदम से कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा मिलेगा।हालात को न उलझाएं :- सऊदी अरब के सुल्तान सलमान ने अमेरिकी नेता से कहा कि ऐसे किसी भी कदम से दुनियाभर के मुसलमान भड़क सकते हैं। मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सिसी ने ट्रंप से निवेदन किया कि वो हालात को न उलझाएं।अमेरिका ने इजरायल के दावे पर मुहर लगाते हुए ऐतिहासिक शहर यरुशलम में अपना दूतावास स्थानांतरित करने का फैसला किया है।