सहायक संचालक रिवर्ट नहीं मर्ज होंगे !

भोपाल: राज्य शासन एकीकृत बाल विकास परियोजना संचालनालय और महिला सशक्तिकरण संचालनालय को मर्ज कर रहा है।महिला एवं बाल विकास विभाग के सौ सहायक संचालकों को अब रिवर्ट नहीं किया जाएगा। बल्कि उन्हें विभाग में ही मर्ज कर विभिन्न् पदों पर आसीन किया जाएगा। उच्च स्तर पर यह फैसला हो गया है। यह प्रस्ताव अब प्रशासकीय स्वीकृति के लिए विभाग की मंत्री अर्चना चिटनिस को भेजा गया है। मंत्री की सहमति के बाद कैबिनेट को भेजा जाएगा।रिवर्ट करने की बनी नौबत:-परफॉर्मेंस के आधार पर राज्य शासन एकीकृत बाल विकास परियोजना संचालनालय और महिला सशक्तिकरण संचालनालय को मर्ज कर रहा है। ऐसा करने से केंद्र सरकार से वर्ष 2012 में मिले सहायक संचालकों के सौ पदों पर पदोन्न्त हुए परियोजना अधिकारियों को रिवर्ट करने की नौबत आ गई थी।विभाग के वित्त अधिकारी ने इन अफसरों को रिवर्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। सूत्र बताते हैं कि परियोजना अधिकारियों ने इस पद पर पदोन्नत होकर करीब पांच साल काम कर लिया है। इसलिए उच्च स्तर पर उन्हें विभाग में ही मर्ज करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि इन अफसरों को कहां रखा जाएगा, इसे लेकर अंतिम फैसला होना शेष है।कोई बड़ी उपलब्धियां नहीं:-सूत्र बताते हैं कि दोनों संचालनालयों को मर्ज करने के पीछे एकीकृत बाल विकास परियोजना संचालनालय के कामकाज को लेकर नाराजगी है। सूत्र बताते हैं कि विभाग के काम में कसावट लाने के लिए दोनों संचालनालयों को अलग-अलग किया गया था, लेकिन एकीकृत बाल विकास संचालनालय कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर सका। इसलिए दोनों को फिर से मर्ज कर रहे हैं।राज्य सरकार को देन होगा वेतन :-सहायक संचालकों के यह पद केंद्र सरकार ने स्वीकृत किए थे। इसलिए इन अफसरों का आधा वेतन केंद्र सरकार दे रही थी, लेकिन केंद्र ने पिछले साल ये पद समाप्त कर दिए हैं। यानी अब सौ सहायक संचालकों को पूरा वेतन राज्य सरकार को ही देना पड़ेगा।
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