युवास्था पर असमय सवार होता बुढ़ापा !

दिल्ली : जब से हम अंधी आधुनिकरण की दिशा में भागते हुए प्रकृति से दूर भागते हुए आने आपको आधुनिक युग पुरुष का दम्भ पालते हुएजितना प्रकृति के साथ साथ अपना खुद का नुकसान बिना सोचे समझे निरंतर करते जा रहे है। तब निश्चित ही वो दिन दूर नहीं जब हमारे अपने साथ ही तमाम लोगों में असमय जवानी में ही बाल समय से पूर्व सफेद, हड्डियों में विकृति जैसे बूढ़ों वाले लक्षण नजर आने लगें तो यह अतिशोक्ति नहीं होगी। अगर ऐसा कुछ आपको दुखने में आने लगे तो फिर निश्चित ही चिंता करने वाली गंभीर बात है।इसके लिए कितने हीआपके जानने वाले, परिचित, रिश्तेदार और यहां तक कि आस-पड़ोस के लोग भी आपको कई तरह के अपने अपने तरह से बिन मांगे अजीबोगरीब सुझाव वो भी अविलम्ब निःशुल्क किसी विशेषज्ञ की तरह देना आरम्भ कर दें।जिसे सुनकर आपके रातों की नींद रफूचक्कर न हो जाए। यदि ऐसा कुछ हो भी गया है तो घबरायें नहीं बल्कि इसके मूल में जा कर वास्तविक रूप से हुई चूक को अपने थोड़े से प्रयास से सुधार किया जा सकता है।और यह जानकर आपको हैरानी होगी कि सारी समस्याओं की जड़ है केवल पानी। जिसे हम अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी में अनेको प्रकार से उपयोग करते हैं। किन्तु आपको यह मालूम होना चाहिए की कौन सा पानी हमारे लिए लाभ दायक है और कौन सा हानि कारक , और इस नुकसान देने वाले पानी से अपने आपको कैसे बचा सकें।पानी है आपकी समस्याओं की जड़:-संभवत: आपकी समस्याओं की जड़ वह पानी ही है, जिसे आप पीते हैं। जिससे आप खाना पकाते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की हर जरूरत में इस्तेमाल करते हैं। हो सकता है पानी के बारे में भी आपको किसी ने कहा हो, लेकिन यहां हम आपको उदाहरण सहित बता रहे हैं कि कौन सा पानी आपको ऐसी बीमारियां दे रहा है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।बुढ़ापा बांट रहा डीप बोरिंग का पानी:-शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी पानी की सप्लाई में खामियों के चलते हम और आप जमीन में डीप बोरिंग करके जहां भू-गर्भ जल स्तर को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं अब इससे समय से पहले बुढ़ापा भी आ रहा है। हालिया शोध में यह बात सामने आई है।देश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग किये शोधों के उपरांत जो तथ्य प्राप्त हुए , वह चौंकाने वाले हैं। 145 -155 फुट से नीचे पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होती है।इसके कारण दांतो की पर्त पीली एवं साथ ही अस्थियों में ढेढ़ापन जैसी बीमारी बहुत तीव्रता से लोगों में बढ़ रही है। जिसके दुष्परिणाम लोग असमय बुढ़ापे से ग्रस्त हो रहे हैं। फ्लोराइड से बढ़ रहा है खतरा:-शोधकर्ताओं की माने तो भूगर्भ में नीचे काफी गहराई तक नाइस चट्टानें होतीं हैं। जिसके काले हिस्से में फ्लोराइड रहता है। जिस भूगर्भ जल का उपयोग हमलोग रोजमर्रा के कार्यों के लिए करते हैं, वह भी वर्षा जल ही है। वर्षा जल भूगर्भ में 150 फीट की गहराई तक पहुंचता है। यह भूगर्भ में फ्लोराइड के प्रभाव को कम या संतुलित करता है। यही कारण है कि इतनी गहराई वाले जल से बीमारी का खतरा नहीं रहता है। फ्लोराइड की अधिक मात्रा मानव शरीर में जाने से हड्डियों में टेढ़ापन आता है। इस वजह से 35-40 के महिला-पुरुष भी 75-80 वर्ष के वृद्ध की तरह झुककर चलते हैं। दांत में पीलापन, थायरॉयड, आंख, कान और लीवर पर भी प्रभाव पड़ता है।दो सौ फुट गहरे बोरिंग के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होती है। मानक से अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी के पीने से हड्डियों में विकृति आती है।आर ओ पानी को ही पीने में उपयोग करें:- एक निश्चित अवधि से अधिक गहराई तक खनन नहीं करें । इसके पश्चात् भी यदि ज्यादा गहराई तक बोरिंग करके पीने के लिए पानी निकाल रहे हैं तो आरओ के द्वारा ही आप उसे पीने योग्य बना सकते हैं। उबालकर पानी से फ्लोराइड के नुकसान को कम नहीं किया जा सकता है। शहरों में जल प्रदाय प्रबंधन बोर्ड का पानी पीने के लिए सुरक्षित होता है, क्योंकि वह कई परिक्षणों के उपरांत ही आम जनता को सप्लाई किया जाता है।
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