करीला मेला आचार संहिता और फसल की मारामारी के चलते रहा फीका

अशोकनगर ; माँ जानकी मंदिर करीला जो कि अशोंकनगर जिले की मुंगावली तहसील की ग्राम पंचायत जसैया में रंगपंचमी 06 मार्च को विशाल मेला का आयोजन हुआ। विधानसभा क्र. 0 34 मुंगावली के विधायक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के आकस्मिक निधन के कारण यहां उप चुनाव की प्रक्रिया के चलते आदर्श चुनाव आचार संहिता लागु की गई थी। जो मेला से मात्र तीन दिन पूर्व ही हटाई गई ,जिसके चलते करीला मेले से सम्बंधित व्यवस्थाएँ चाहे वो आवागमन मार्ग की हों या फिर मेला में दीगर आवश्यकताओं के संबं में रही हों। उनको अच्छे से दुरस्त करने का प्रशासन को पर्याप्त समय नहीं मिला। जिस कारण से अच्छे से व्यवस्थाएं नहीं हो सकीं विशेष कर सड़कों के गडडे तथा साइडों की रेलिंग्स ठीक नहीं हो सकीं। फल स्वरूप विगत वर्ष की तुलना में रोड हादसे अधिक घटित हुए। इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था व श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखकर प्रशासन ने समय पर जो इंतजाम हो सकते थे ,वो इंतजाम किए गए । मन्नतों के पूरी होने पर कराई राई :-रंगपंचमी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का करीला धाम आना प्रारंभ हो गया था। रंग पंचमी के दिन व रात में लाखों श्रद्धालुओं ने मॉ जानकी के मंदिर में शीश नवाया तथा दर्शन लाभ लिए। मॉ जानकी के दरबार में आकर लाखों श्रद्धालुओं ने माता जानकी मैया के जयकारों के साथ रैलिंग में कतारबद्ध होकर दर्शन किए तथा मन्नतें मॉगी। मन्नतें प्राप्त हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के बाहर राई नृत्य करवाया। करीला के मुख्य मंदिर में मॉ जानकी के साथ-साथ महर्षि वाल्मिीकि व लव-कुश की प्राचीन प्रतिमायें स्थापित है। साथ ही राम दरबार व राधाकृष्ण की मूर्तियां भी मंदिर परिसर में स्थापित की गयी है। माँ के दरबार में पूरी होतीं मुरादें :-करीला धाम में मान्यता है कि जिसके सन्तान न हो वह यहां आकर मन्नतें मांगे तो उसकी मुराद मॉ जानकी पूरी करती हैं। मुराद पूरी होने पर श्रद्धालु यहां आकर अपनी श्रद्धानुसार राई नृत्य करवाते है। क्षेत्र में यह लोकोक्ति प्रचलित है कि लव व कुश के जन्म के बाद मॉ जानकी के अनुरोध पर महर्षि वाल्मिीकि ने उनका जन्मोत्सव बडी धूम-धाम से मनाया था। जिसमें स्वर्ग से उतरकर अप्सरायें आई थी तथा उन्होने यहॉ नृत्य किया था। वही जन्मोत्सव आज भी रंग पंचमी के अवसर पर यहॉ मनाया जाता है। उसी उत्सव में हर वर्ष सैकडों नृत्यांगनायें यहॉ राई नृत्य प्रस्तुत करती है। नृत्यांगनाएं ओढ़नी से घूंघट डाले नगड़ियों की गूंज एवं मृदंग की थाप पर लम्बे घेर वाले लंहगे एवं पैर में घुंघरू की खनखनाती आवाज पर मनमोहक अदाओं के साथ रातभर नृत्य करती रहीं। ऐसा लग रहा था मानो अप्सराएं जमीन पर उतरकर जन्मोत्सव की खुशी मना रही हों। भोर होने पर नृत्यांगनाओं द्वारा प्रस्तुत बधाई नृत्य के साथ मेला का समापन हुआ। वॉच टावर से लिया जायजा:-पुलिस के जवान मंदिर परिसर में बनाए गए 35 फिट वॉच टावर पर पहुंचकर दूरबीन से सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। साथ ही मंदिर परिसर एवं मेला स्थल पर लगाए गए सी.सी.टी.वी.कैमरों से मेले पर सतत निगरानी रखे रहे। मेला व्यवस्था में आवागमन को सुगम बनाने हेतु चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई थी। पानी के टेंकरों से हुआ पानी सप्लाई:-मेले में पानी के विशेष इंतजामों के साथ ही पानी के टेंकरों द्वारा पानी की सप्लाई की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। प्रत्येक टेंकर में टोटियां लगवाई गई थीं जिसके कारण मेले में पानी की कोई भी परेशानी नहीं हुई।मेले में झूलों का लिया आनंद:-मेले में शिरकत करने आने वालों लोगों ने मेले का भरपूर आनंद लिया। मेले में लगे बड़े-बड़े झूलों का युवाओं ने तथा छोटे झूलों का बच्चों ने झूलकर आनंद लिया। ग्रामीणों द्वारा मेले में लोहे के कढ़ाईयों एवं सामग्री की खरीदी की गई। साथ ही दुकानों में व्यंजनों का स्वाद भी ग्रामीणों द्वारा लिया गया।इस वर्ष अनुमान से कम आये श्रद्धालु :-इस वर्ष रंग पंचमी के अवसर पर लगने वाले माँ जानकी मेला में विगत वर्षों की तुलना में आधे से भी कम दर्शनार्थियों का आगमन हुआ। जिसके पीछे प्रमुख्य कारण किसानों का अपनी फसल समेटना रहा है,क्योंकि इस वर्ष किसानों की फसल समय से पूर्व आने का संकेत के साथ ही साथ हवा पानी और ओलों के का कंही कहीं गिरना भी किसानों के लिए चिंतित होना तथा शादियों का भी अत्याधिक इस समय होने से मेला का रंग वो नहीं दिखा जिसके लिए यह करीला मेला जाना जाता है। मेला में प्रतिबंध रहा बे असर ;- इस बार मेला में दुकानदार कम दुकानदारी होने की बात कहते सुनाई दिए। मेला स्थल पर पानी पाउच प्रतिबंधित करने के बाद भी खूब खुलेआम बिके।वहीं नारियल अगरबत्तियों पर प्रशासन ने पूर्णरूपेण रोक लगाई थी जो मात्र औपचरिकता ही बनकर रह गई। लोगों ने प्रशासन द्वारा लगाए प्रतिबंधों को अनसुना करते हुए पानी पाउच का क्रय -विक्रय किया अपितु मंदिर परिसर के आस-पास नारियल और अगरबत्तियों को भी न केवल लेकर गए बल्कि उन्हें अपनी मन मर्जी पूरी करते हुए उन्हें चढ़ाया भी। चुनाव आदर्श आचार संहिता का असर:- विधानसभा क्र. 0 34 मुंगावली के विधायक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के आकस्मिक निधन के कारण यहां उप चुनाव की प्रक्रिया के चलते आदर्श चुनाव आचार संहिता लागु की गई थी। जो मेला से मात्र तीन दिन पूर्व ही हटाई गई ,जिसके चलते करीला मेले से सम्बंधित व्यवस्थाएँ चाहे वो आवागमन मार्ग की हों या फिर मेला में दीगर आवश्यकताओं के संबं में रही हों। उनको अच्छे से दुरस्त करने का प्रशासन को पर्याप्त समय नहीं मिला। जिस कारण से अच्छे से व्यवस्थाएं नहीं हो सकीं विशेष कर सड़कों के गडडे तथा साइडों की रेलिंग्स ठीक नहीं हो सकीं। फल स्वरूप विगत वर्ष की तुलना में रोड हादसे अधिक घटित हुए। इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था व श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखकर प्रशासन ने समय पर जो इंतजाम हो सकते थे ,वो इंतजाम किए गए । कमिश्नर ग्वालियर संभाग बी.एम.शर्मा, आई.जी. अंशुमन यादव, कलेक्टर व्ही..एस.चौधरी एवं पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह ने मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे और अधीनस्थ अधिकारियों केा आवश्यहक दिशा निर्देश देकर उन्होने व्यवस्थाओं को अपनी तरह से बेहतर बनाने का प्रयास किया । अपर कलेक्टर ए.के.चांदिल को मेले की व्यवस्थाओं के लिए मेला अधिकारी बनाया गया था तथा मेला प्रभारी का दायित्व एस.डी.एम.रवीश श्रीवास्तव को दिया गया था। जहां पर जिले के अतिरिक्त दूर दराज से आये लाखों श्रद्धालुओं ने करीला पहुंचकर किए मॉ जानकी के दर्शन किये तथा अपनी मन्नते उतारीं।
 
 
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