स्‍मार्टफोन बच्‍चों के स्वास्थ्य से कर रहे खिलवाड़ !

लन्दन ; स्‍मार्टफोन ने चाहे लोगों की जिंदगी बहुत ही आसान कर दी हो ,किन्तु एक शोध की माने तो ये आधुनिक तकनीक आपके बच्‍चों के लिए अत्यंत ही खतरनाक है। इसका सीधा प्रभाव उनके मानसिक ही नहीं शारीरिक विकास पर भी पड़ रहा है। ब्रिटेन में हार्ट ऑफ इंग्लैंड फाउंडेशन के एक शोध में पता चला है कि बच्चों के लिए टचस्क्रीन वाले फोन बहुत ही नुकसानदायक हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इससे बच्‍चों की अंगुलियों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं और वे पेन या पेंसिल पकड़ने में दिक्‍कत अनुभव करते हैं। ;स्‍कूली बच्‍चे झेल रहे हैं समस्‍या :-हार्ट ऑफ इंग्लैंड फाउंडेशन के बालरोग विशेषज्ञों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि आजकल स्कूल आने वाले बच्चे अक्सर हाथों की समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्‍हें पेंसिल और पेन पकड़ने में परेशानी हो रही है, जबकि अब से 10 वर्ष पूर्व ऐसा नहीं था। शोध से पता चला कि बच्‍चों की पकड़ कमजोर हो रही है जिससे उनके लिखने और चित्रकला जैसे हुनर भी प्रभावित हो रहे हैं। इन बातों का रखना होगा विशेष ध्‍यान:-शोधकर्ताओं का कहना है कि अभिभावकों को कुछ विशेष बातों का ध्‍यान रखना होगा क्‍योंकि उनकी मदद के बिना इसे रोकना संभव नहीं है। उन्‍हें बजाय फोन पर अपने बच्‍चों को व्‍यस्‍त छोड़ने के खुद को उनके साथ जोड़ना होगा और उन्‍हें ब्लॉक बनाने, खिलौने खेलने या रस्सियां खींचने जैसे खेल बच्‍चों के साथ खेलने होंगे, जिससे उनकी मांसपेशियां मजबूत बनें। बच्‍चों को चित्रकला के लिए भी प्रोत्‍साहित करें इससे उनकी रचनात्‍मकता तो बढ़ेगी ही साथ ही वो स्‍वस्‍थ रहेंगे। शोधकर्ताओं की सलाह है कि स्मार्टफोन और टचस्क्रीन के इस्तेमाल से बच्चों की मांसपेशियों में कम उम्र में ही अकड़न आने लगती है, जिससे पेन या पेंसिल लंबे समय तक पकड़ने में परेशानी और दर्द का अनुभव करते हैं। इस नकारात्‍मक प्रभाव को दूर करने के लिए उनको इन चीजों से दूर रखना होगा। स्‍मार्टफोन आपके बच्‍चों की सेहत पर सीधा असर डालते हुए उनकी उंगलियों की नसों को कमजोर कर रहे है।जिस के कारण बच्चों के स्वास्थ्य को असमय इन टाच स्कीन और स्मार्ट फोन्स से हो रहा है बड़ा नुकसान। अतः यह आवश्यक है कि समय रहते यदि अभिभावक गण ने आने वाली इस विभीषका पर ध्यान नहीं दिया तो दुनिया के तमाम बच्चों के स्वास्थ्य को जाने-अन्जाने हम गंभीर रूप से हानि होने से नहीं रोक पायेंगें। जब तक हमे समझ आएगी बहुत देर हो चुकी होगी।

 
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