मीडिया जनता की प्रहरी , मीडिया संवाद कार्यक्रम सफल सम्पन्न !

अशोकनगर :-जनसम्पर्क संचनालय म. प्र. भोपाल द्वारा निर्धारित की गई अशोकनगर जिले में मीडिया कर्मियों के लिए गुरूवार को स्थानीय होटल मंगल रेसीडेंसी के सभागार में "मीडिया संवाद कार्यक्रम " आयोजित किया गया । जिसमें बड़ी संख्या में प्रिंट एवं इलेक्टॉनिक्स मीडिया कर्मियों ने अपनी उपस्थिती दर्ज की।इस कार्क्रम में भोपाल से आये वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ल एवं विकास तिवारी ने प्रमुख वक्त के रूप में शामिल हो अपने विचार व्यक्त किये। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं:- जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। भविष्य में आने वाले समय में पानी का संरक्षण करना आवश्यक है। साथ ही वर्तमान में छोटी-छोटी जलसंरचानाओं का जीर्णोद्धार करवाना बेहद जरूरी है। इस आशय के विचार गुरूवार को भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार विकास तिवारी प्रदेश टुडे द्वारा जनसम्पर्क संचालनालय के निर्देशानुसार जिला जनसम्पर्क कार्यालय अशोकनगर के तत्वावधान में स्थानीय होटल मंगल रेसीडेंन्सी में जल संरक्षण एवं आत्म हत्या ओं को रोकने हेतु किये जाने वाले उपाये एवं प्रयासों में मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पत्रकार बन्धुओं को सम्बोधित करते हुए कही। मीडिया संवाद कार्यक्रम में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जिला ब्यूरो एवं रिपोर्टर उपस्थित थे।जल संरक्षण वर्तमान समय की जरूरत :- वरिष्ठ पत्रकार तिवारी ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की जरूरत है इसके साथ ही अधिक से अधिक वृक्ष लगाये जाए। जिससे पर्यावरण को संतुलित किया जा सके। वर्तमान में समय इसके लिए महत्वपूर्ण कदम न उठाए गए तो, भविष्य में आनी वाली पीढ़ी को काफी पानी के लिए काफी परेशानी का सामना करना पडेगा। उन्होंने कहा कि जीवन के लिए जल आवश्यशक है। हम सभी को पानी के महत्व को पहचानना होगा। जिससे आने वाली पीढी के लिए पर्याप्त मात्रा में जल का उपहार दे सके। मीडिया की भूमिका इस दिशा में बेहतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नदियों में होने वाले प्रदूषण को रोके जाने के लिए प्रयास किये जाने चाहिए। मीडिया जनता की प्रहरी :- कहा कि आत्म हत्याओं को रोकने के लिए मीडिया की अहम भूमिका होती है। मीडिया जनता की प्रहरी होती है तथा सामाजिक सरोकार से जुडकर काम करती है। आत्म हत्यााओं को रोकने के लिए मीडिया द्वारा सकारात्म्क खबरों को ज्यादा से ज्यादा प्रकाशित करें।जल, वायु, भूमि, वृक्ष को धर्म के रूप में देखा जाना आवश्यक:- मीडिया संवाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार विजय शुक्ला ने कहा कि हमारे जीवन में जल की उपयोगिता काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन का ठोस इंतजाम होना चाहिए। हमें नैतिक बातों को पहचानतें हुए जल, वायु, भूमि, वृक्ष को धर्म के रूप में देखा जाना आवश्यक है। भारत की लाज बचाने के समान जल बचाना हमारा धर्म है। मीडिया इस भूमिका का निर्वहन बखूबी कर सकता है। नदियों को बचाने की चिंता हम सभी को करना चाहिए। नदियों को बचाने के लिए नदी संरक्षण के कार्य किये जा रहे है। नदियों के किनारे पौधरोपण कर तटों को अतिक्रमण से मुक्त किया जा रहा है। जीवन में उपयोगी जल को बर्बाद और प्रदूषित नहीं करना चाहिये। प्रकृति के द्वारा दिया गया जल एक अनमोल उपहार है। जल की वजह से ही धरती पर जीवन संभव है। हमें जीवन के सभी कार्यों को निष्पादित करने के लिये जल की आवश्यकता है। बिना इसको प्रदूषित किये भविष्य की पीढ़ी के लिये जल की उचित आपूर्ति के लिये हमें पानी को बचाने की जरुरत है। उन्होने उपस्थित पत्रकारबन्धुओं से कहा कि जल संरचनाओं के पुर्नउत्थाउन, जल संरक्षण एंव जल को संरक्षित रखने संबंधी समाचार एवं लेख समाचार पत्रों में प्राथमिकता के साथ प्रकाशित कर आम लोगों को जागरूक कर इसे बढ़ावा देना चाहिये।मीडिया संवाद कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश :- मीडिया संवाद कार्यक्रम के प्रारंभ में सहायक संचालक जनसंपर्क एस.एम.सिद्धीकी द्वारा मीडिया संवाद कार्यशाला के उद्देश्यों के बारे में प्रकाश डाला गया। उन्होंने भोपाल से आये वरिष्ठ पत्रकारों एवं जिले के प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुडे समस्त मीडिया कर्मियों का स्वांगत करते हुए कहा कि जनसंपर्क संचालनालय भोपाल के निर्देशानुसार जिला जनसंपर्क कार्यालय अशोकनगर के तत्वा्धान में मीडिया संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मीडिया संवाद कार्यक्रम में वर्तमान समय में मीडिया की भूमिका एवं बदलाव के साथ साथ जल संरक्षण एवं जल संरक्षण के लिए जन- जन को जागरूक करना तथा समाज में फैल रही आत्मं हत्याओं की घटनाओं को रोकने हेतु किये जाने वाले उपाये एवं प्रयासों में मीडिया की मुख्य भूमिका को रखा गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय से जल की एक एक बूंद को सहजने से ही वर्ष भर जल की उपलब्धसता प्राप्त हो सकेगी। साथ ही आने वाली पीढी को जल आसानी से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में आत्म हत्याओं पर अंकुश लग सके, इस हेतु आत्महत्यााओं के कारकों पर भी फोकस करके जीवनअत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बारे में जनजागृति लाना आवश्यंक होगा। उन्होंने कहा कि समाज को एक नई दिशा प्रदान करने में मीडिया की महत्वमपूर्ण भूमिका होती है। ’’आत्मंहत्याओं की प्रवृति रोकने में मीडिया की भूमिका’’-डॉ. संधु :-जब से हमारे समाज में आधुनिक दिखाबे की प्रवृति लोगों में प्रविष्ट’ हुई है तब से हमारा समाज एवं परिवार नामक संस्थाम का विखण्डन किसी न किसी रूप में देखने को मिल ही जाता है जिसका उदाहरण है सम्मिलित परिवारों का विखरकर एकल परिवार में परिवर्तित होना जहां पर आये दिन किसी न किसी परिवारिक, सामाजिक, कारोबारी और आर्थिक तंगी के कारण लोग अपना मानसिक संतुलन, सहनशीलता और समर्पण को खोते हुए असमय आत्म हत्याओं की ओर अग्रसर हो रहे है। इसके लिए आवश्यहक है कि समय - समय पर उन लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को जानने- सुनने के साथ साथ विभिन्न स्तरों पर संवाद स्थांपित किये जाए तथा समाज में व्याप्त आधुनिक दिखाबे कि दुष्यत प्रवृति तथा आर्थिक – सामाजिक सुरक्षा व्यतवस्था के प्रबंधन पर विषय विशेषज्ञों की सेवाएं लेते हुए तमाम तरह से संगो‍ष्ठियां, नुक्क्ड नाटक तथा पोस्टार प्रदर्शनी के माध्यम से जन जागृति पैदा की जाए। इसके प्रचार प्रसार के लिए सबसे अधिक जरूरी है प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया का इसमें सक्रिया योगदान प्रदान करना जो समाज में व्याप्तं आत्म हत्याओं की प्रवृति रोकने मेंअत्यंत आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है। जिसके निष्क्रिय रहने का आसय है। उन सब उपायो की सूचना लोगों तक नही पहुंच पाना जिसके लिए आत्म हत्या की प्रवृति रोकने की काउंसलिंग जरूरी है।जल संरक्षण एवं शुद्धिकरण के लिए महत्वपूर्ण बिन्दु:- 1.नदी के उद्गम से ही हो उपचार।2.होटल कर रहे है नदियों को प्रदूषित।3.औद्योगित इकाईयां पानी को कर रही है जहरीला।4.रासा‍यनिक खाद्य एवं कीटनाशकों पर रोक आवश्याक। 5.नदी के घर में घर नही बनाये।सुझाव एवं निष्कर्ष:-1.नदी संरक्षण के लिए शासन की तरफ से सशक्त एवं स्पष्ट नीति बनाते हुए इसका क्रियान्वयन किया जाए। 2.शासन द्वारा नदी संरक्षण के लिए अलग से बोर्ड बनाकर इसमें विषय विशेषज्ञों को रखा जाए। 3.अवैध रूप से नदी से रेत खनन एवं परिवहन पर सख्ती से रोक लगाई जाए। 4.समाज को नदी संरक्षण बाबत जागृत किया जाए। 5.पूजन सामग्री आदि नदी में प्रवाहित करने पर प्रतिबंध लगाया जाए। 6.नदी उद्गम से लगाकर कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट किया जाए इसके लिए नदी किनारों पर बांस का रोपण अधिक संख्या में किया जाए। 7.नदी के किनारे बसे गांव का विकास नदी संरक्षण के अनुरूप किया जाना चाहिए। 8.दूषित जल को स्वच्छ करने के पश्चात ही नदी में प्रवाहित करें।9.नदी के जल को रासानिक पदार्थ दूषित करते है अत: इनके उपयोग पर रोक लगे।10.नदी में जल जीव तथा मगरमच्छ छोडे जिनके डर से अवैध खनन न हो सके।11.नदी संरक्षण मुद्दा सामाजिक स्तार पर बनाना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का शुभारंभ मॉ सरस्वती जी के चित्र पर दीप प्रज्जावलन एवं फूलमाला पहनाकर किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारों के प्रश्नों एवं सुझावों पर आवश्यक चर्चा कर समाधान किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार अपने शायरना अंदाज में ग्लोरी न्यूज के चीफ एडीटर डॉ.डी.एस.संधु द्वारा किया गया।जिसका आंनद उपस्थित अतिथियों सहित सभी साथियों ने वाहवाही करते हुए करतल ध्वनि के साथ उठाया !
 
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