गुफा में इतने दिन जिंदा रहना बड़ा चमत्कार, पूरा हुआ थाईलैंड रेस्क्यू ऑपरेशन !

थाइलैंड: उत्तरी थाइलैंड की गुफा में लगभग दो सप्ताह के लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के पश्चात् इस गुफा में फंसे कोच सहित सभी बच्चे सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए हैं। 18 दिन बहुत लंबा समय होता है, विशेष रूप से जब मुसीबत में फंसे हों किन्तु बच्चों ने ये कर दिखाया। जो बिना हौसला खोए जिंदा भी रहे और सुरक्षित बाहर भी निकल आए। हालांकि, इस ऑपरेशन में एक गोताखोर प्राण वायु अर्थात ऑक्सीजन के समाप्त होने पर अवश्य शहीद हो गया।गुफा में इतने समय जिंदा रहना बड़ा चमत्कार:-बच्चों का 18 दिन तक गुफा में जिंदा रहना किसी चमत्कार से कम नही हैं। इसमें कोच की भूमिका बड़ी अहम है। कोच इन बच्चों के लिए भगवान साबित हुआ। उसने ही दिन-रात बच्चों का हौसला बनाए रखा और उन्हें विश्वास दिलाया कि सब जिंदा बाहर निकलेंगे। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर कोच में इतनी ऊर्जा और हौसला कहां से आया।यह है ना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय बात तो इसका भी आपको खुलासा कर देते हैं।कोच के साथ सभी बच्चों ने रखा हौसला :-बच्चों के साथ गुफा में फंस गया कोच दरअसल पहले बौद्ध भिक्षु रहा है। अतः उसने अपने आध्यात्मिक ज्ञान का उपयोग करते हुए बच्चों का हौसला बनाए रखा और बच्चों को बिना किसी घबराहट के शांत रखने में कामयाब रहा । जिसके कारण लगभग 18 दिनों तक बच्चों का जिंदा रहना संभव हो पाया।गुफा को देखने की चाहत में फंस गए बच्चे:-उत्तरी थाईलैंड में स्थित एक गुफा को अंदर से देखने की चाहत इन 12 बच्चों और उनके कोच को रोमांचित कर रही थी। वो 23 जून की शाम थी। फुटबॉल का अभ्यास करने के पश्चात्12 बच्चे अपने कोच के साथ लौट रहे थे। अभ्यास के बाद सभी गुफा के अंदर दाखिल हुए, परन्तु अगले पल उनके साथ क्या होने वाला है इसके सम्बन्ध उन्हें जरा भी आभास नहीं था। जैसे ही वह गुफा में प्रवेश हुए उसके कुछ देर बाद ही बाहर आई भारी बारिश के कारण गुफा में बाढ़ आ गई और सब के सब अंदर फंस गए। साइकिलें और जूते गुफा के प्रवेश द्वार पर मिले:-23 जून: 11 से 16 साल के 12 बच्चे और उनका कोच (25) उत्तरी थाइलैंड की थाम लुआंग गुफा में घुसे और वहीं फंस गए। शाम को एक बच्चे की मां ने बेटे के लापता होने की रिपोर्ट की। स्थानीय अधिकारियों को बच्चों की साइकिलें और जूते गुफा के प्रवेश द्वार पर मिले।24 जून: पार्क अधिकारियों को पैरों के निशान मिले। माना गया वो बच्चों के हैं।9 दिनों से गुफा में फंसे फुटबॉलर्स ने वीडियो संदेश के जरिए कहा- 'हम ठीक हैं'। 25 जून: बच्चों की तलाश में नेवी सील के गोताखोर गुफा में घुसे।26 जून: गोताखोर कई किमी अंदर एक टी-जंक्शन तक पहुंचे। लेकिन तेज बहाव की वजह से लौटने को मजबूर हुए।27 जून: अमेरिका के 30 नौसेना कर्मी और तीन ब्रिटिश विशेषज्ञ गोताखोर भी गुफा में पहुंचे। तेज बहाव की वजह से उन्हें भी पीछे हटना पड़ा।28 जून: बारिश के कारण अभियान रुका। गुफा से पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए।30 जून: बारिश रुकने पर गोताखोर गुफा में कुछ और अंदर तक घुसने में सफल। 01 जुलाई: गुफा के अंदर ऑपरेटिंग बेस बनाया। सैकड़ों एयर टैंक और अन्य चीजें अंदर पहुंचाईं।2 जुलाई: ब्रिटिश गोताखोरों ने गुफा के अंदर पट्टाया बीच से 400 मीटर अंदर बच्चों और उनके कोच को जीवित पाया।3 जुलाई: बच्चों तक खाद्य पदार्थ, दवाएं और उच्च कैलोरी वाले जेल पहुंचाए गए। 4 जुलाई: बच्चों को गोताखोरी के मास्क और सांस लेने के उपकरणों का प्रशिक्षण देना प्रारंभ।5 जुलाई: पंछियों के घोंसले एकत्रित करने वालों के एक दल ने पहाड़ के ऊपर गुफा के अंदर जाने का वैकल्पिक रास्ता खोजने की कोशिश की। 6 जुलाई : बच्चों तक एयरलाइन स्थापित करने की कोशिश में एक गोताखोर की मृत्यु।7 जुलाई : गुफा में से एक संदेश भेज बच्चों के कोच ने अभिभावकों से माफी मांगी।8 जुलाईः पहली बार चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। 9 जुलाईः चार और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया10 जुलाईः बाकी बचे 4 बच्चों और कोच को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन पूरा हुआ । गुफा को देखने की चाहत में फंस गए बच्चे:- उत्तरी थाईलैंड में स्थित एक गुफा को अंदर से देखने की चाहत इन 12 बच्चों और उनके कोच को रोमांचित कर रही थी। वो 23 जून की शाम थी। फुटबॉल का अभ्यास करने के पश्चात्12 बच्चे अपने कोच के साथ लौट रहे थे। अभ्यास के बाद सभी गुफा के अंदर दाखिल हुए, परन्तु अगले पल उनके साथ क्या होने वाला है इसके सम्बन्ध उन्हें जरा भी आभास नहीं था। जैसे ही वह गुफा में प्रवेश हुए उसके कुछ देर बाद ही बाहर आई भारी बारिश के कारण गुफा में बाढ़ आ गई और सब के सब अंदर फंस गए।

 

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