बिहारी बाबू होंगे पटना साहब से कॉग्रेस के प्रत्याशी !

दिल्ली:शनिवार को पटना सांसद और फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी इस पार्टी को उसके स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी के इस महोत्सव को करारा झटका देते हुए आज अलविदा करते हुए कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला की मौजूदगी मेंदेश की सबसे पुरानी पार्टी कॉग्रेस में शामिल हो गए।अपनी उपेक्षा से दुखी:- जैसा की देश की राजनैतिक गलियारों में अटकले लगे जा रही थी कि बिहारी बाबू का भाजपा के नरेंद्र मोदी सरकार बनने के उपरांत बीजेपी के पितृ पुरुष अडवाणी खेमे के होने के कारण एकदम नजरंदाज करते हुए सरकार में वह इज्जत और सम्मान नहीं मिल रहा था जो अटल सरकार के समय शत्रुध्न सिन्हा को प्राप्त था ।जिसके चलते वह अपने स्वाभिमान की जंग अपने पूरे कार्यकाल में लड़ते रहे।शायद उनके तीखे तेवरों को मोदी एंड पार्टी को सहन नही हो रहे थे जिसके फल स्वरूप जो स्पष्ट था की शायद भाजपा बिहारी बाबू को लोकसभा से पार्टी प्रत्याशी नहीं बनाएगी और यह धारणा तब सत्य साबित भी हो गई ,जब इनकी पारम्परिक सीट पर प्रथम बार लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उस रवि शंकर को मैदान में उतर दिया जिसने इसके पहले कभी कोई बड़ा आम चुनाव ही नही लड़ा था । अब लोगों की नजर जरुर अपने इस लाड़ले सांसद सिन्हा के अगले कदम को देख रही थी कि वो अपने राजनीति की पारी का यही इतिश्री करते हैं या फिर कुछ नवीन मार्ग पर अपने कदम बढ़ाते है ! अपने लोगों की सेवा करने की भावना को दिल में सजाते हुए आखिर कांग्रेसऔर राहुल गाँधी का दामन थाम कर फिर से पटना साहब से कांग्रेस प्रत्याशी बनकर भाजपा के विरुद्ध ताल ठोककर रविशंकर से दो दो हाथ करने मैदान सम्भालने को तैयार होगये हैं । भाजपा छोड़ने से पहले किये तमाम ट्वीट:-"यह बहुत भारी मन और अपार पीड़ा की बात है कि आखिरकार मैंने छह अप्रैल को भाजपा के 'संस्थापना दिवस' के मौके पर अपनी पुरानी पार्टी को अलविदा कह दिया और किन कारणों से, यह सबको पता है।" उन्होंने कहा कि 'भारतरत्न' नानाजी देशमुख, दिवंगत महान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वायपेयी और मेरे दोस्त व दार्शनिक, शानदार नेता, गुरु और मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गजों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन में निखरा।" कांग्रेस में शामिल होने से कुछ देर पहले उन्होंने एक साथ कई ट्वीट किए, "मैं कुछ लोगों के बारे में बात करना चाहूंगा जो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं, जो अन्याय के लिए जिम्मेदार हैं और लोकशाही को तानाशाही में बदल रहे हैं।" सिन्हा ने कहा, "इस मोड़ पर मैं उन्हें माफ करता हूं और सबकुछ भूल जाता हूं। मेरे और भाजपा के कुछ वर्तमान नेताओं व उनकी नीतियों के बीच जो मतभेद हैं, इस कारण मेरे पास दूसरा रास्ता चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।" सिन्हा ने कहा, "कांग्रेस महात्मा गांधी, (जवाहरलाल) नेहरू, (वल्लभ भाई) पटेल जैसे कई महान राष्ट्रनिर्माताओं और दिग्गजों की पार्टी है।" उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह जिस सबसे पुरानी पार्टी से जुड़ रहे हैं, वह एकता, समृद्धि, प्रगति, विकास और प्रतिष्ठा के संदर्भ में उन्हें जनता, समाज और देश की सेवा करने का मौका देगी। 'बिहारी बाबू' ने कहा, "मैं उम्मीद और इच्छा जताकर प्रार्थना करता हूं कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा भारत के आज और कल के सफल चेहरे, बेहद ऊर्जावान, सक्षम, अनुभवी और परखे हुए युवा नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में मैं सही दिशा में कदम बढ़ा रहा हूं।लोकतंत्र जिंदाबाद :-लोकतंत्र जिंदाबाद! लालू और तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल को कांग्रेस पार्टी का साथ जिंदाबाद। हमारा महान भारत जिंदाबाद। जय हिंद।" बिहारी बाबू होंगे पटना साहिब से कॉग्रेस प्रत्याशी :- भाजपा को उसके स्थापना दिवस के मौके पर जौर का झटका देकर कॉग्रेस की सदस्यता जैसे ही ग्रहण की तो सारी अटकलें दूर करते हुए कॉग्रेस की पट्टी गले में पहनाकर गर्म जोशी से अभिनंदन करते हुये पटना साहिब से अपना प्रत्याशी बनाते हुए भाजपा प्रत्याशी रवि शंकर के साथ ही अपनी परमपरिक सीट पर शत्रुध्न सिन्हा अब उसी पार्टी के लिए मुसीबत बनने जा रहे हैं जिससे वो अभी सांसद हैं।