महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट कल,विधायकों की होगी 5 बजे तक शपथ !

दिल्ली : महाराष्ट्र में विधान सभा चुनाव परिणाम आये कितने ही दिन हो गए है किन्तु किसी भी राजनीत पार्टी को सरकार बनाने स्पष्ट बहुमत नहीं होने से रोज रोज सियासी करवट इधर से उधर होने के चलते कोई भी अभी तक यहां अपनी स्थाई सरकार नहीं बना सकी है । आये दिन एक नया ही खेल देखने को मिल रहा है ।चोरों की तरह गुपचुप कोई सरकार सुबह के सूरज उगने के पहले ही आननफ़ानन में शपथ लेता है तो कोई इसे संविधान की हत्या बताता हुआ सर्वोच्चय न्यायालय में इसे चुनौती पेश कर देता है । बस इस सियासी घमासान पर लोगों की नजरे सुप्रीम कोर्ट पर लगी हुईं है तो फिर यह सुप्रीम कोर्ट ने अपने दायित्वों का निर्वाह करते हुए इस राजनीति की चल रही नौटंकी को समाप्त करने आखिर अपना फैसला निर्धारित समय पर दे ही दिया है । जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने 27 नवंबर अर्थात कल फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया है। साथ ही कल शाम 5 बजे तक विधायकों की शपथ का आदेश दिया है। गुप्त मतदान नहीं किया जाएगा और लाइव टेलिकास्ट होगा। आदेश की एक और बड़ी बात यह है कि प्रोटेम स्पीकर ही फ्लोर टेस्ट करवाएगा यानी स्पीकर का चयन बाद में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आशंका जताई कि देरी की गई तो हॉर्ड ट्रेडिंग हो सकती है।जस्टिस रमना ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होना चाहिए। नागरिकों को अच्छे शासन का अधिकार है।जस्टिस एनवी रमना, अशोक भूषण और संजीव खन्ना की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि कोर्ट और विधायक में लंबे समय से बहस चली आ रही है। इस अब हल करने की जरूरत है। जस्टिस रमना ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होना चाहिए। नागरिकों को अच्छे शासन का अधिकार है। अभी कोर्ट ने महाराष्ट्र के केस के लिए अंतरिम आदेश जारी करेगा। बाद में ऐसे सभी मामलों को लेकर लंबी सुनवाई हो सकती है।न्योता देने वाले पत्र सर्वोच्च अदालत में पेश :-इससे पहले रविवार और सोमवार को भी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इन दलों की मांग थी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार को तत्काल बहुमत साबित करने का आदेश दिया जाए। वहीं, अजित पवार के सहयोग से सरकार बनाने वाली भाजपा का कहना था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए, क्यों यह सब तय करना राज्यपाल और विधानसभा स्पीकर का अधिकार है तथा सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई फैसला दिया तो यह गलत परंपरा बन जाएगी। सोमवार को हुई सुनवाई में देवेंद्र फड़नवीस की ओर से सरकार बनाने का दावा करने वाले और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की तरफ से उन्हें सरकार बनाने के लिए न्योता देने वाले पत्र सर्वोच्च अदालत में पेश किए गए। कोर्ट ने पत्र देखने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला मंगलवार सुबह 10ः30 बजे तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।राज्यपाल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दलीलें रखीं। मेहनता ने जस्टिस एनवी रमना, अशोक भूषण और संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष कहा कि राज्यपाल ने अपने विवेकाधिकार से संतुष्ट होने के बाद सरकार बनाने के लिए बुलाया था। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 22 नवंबर को फडनवीस ने भाजपा की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने भाजपा के 105, एनसीपी के 54 और 11 निर्दलीय तथा अन्य विधायकों के साथ कुल 170 का समर्थन होने का पत्र दिया। अजीत पवार ने भी एक अपने सभी विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपी थी। मेहता के मुताबिक, संविधान के मुताबिक राज्यपाल के इस विवेकाधिकार को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।फ्लोर टेस्ट : महाराष्ट्र में सबसे बड़ा सवाल कौन होगा प्रोटेम स्पीकर? भेजे गए 17 नाम !सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, बुधवार सुबह 11 बजे महाराष्ट्र विधानसभा शुरू हो जाएगी। प्रोटेम स्पीकर बारी-बारी से हर विधायक को शपथ दिलाएंगे। यह प्रक्रिया शाम 5 बजे तक पूरी करना होगी। महाराष्ट्र में कुल 288 विधायक हैं। इसके बाद फ्लोर टेस्ट होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, कोई भी विधायक गुप्त मतदान नहीं कर पाएगा। पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण होगा। यानी कौन विधायक कहां वोट दे रहा है, यह सभी देख पाएंगे।सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट के लिए 5 बजे का समय तय किया है, लेकिन ठीक 5 बजे फ्लोर टेस्ट शुरू नहीं होगा। 5 बजे से बहस शुरू होगी। सभी पक्षों के नेता अपनी-अपनी बात रखेंगे, जिसके बाद ही वोटिंग होगी। इसमें कितना भी समय लग सकता है। इसके बाद ही स्पष्ट हो जाएगा कि देवेंद्र फडणीस सरकार बनी रहेगी या गिर जाएगी। सस्पेंस एनसीपी के विधायक पवार या पाटिल किसका मानेंगे व्हीप:- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनसीपी के विधायक किसका व्हीप मानेंगे, अजित पवार का या जयंत पाटिल का। अजित पवार पहले विधायक दल के नेता बनाए गए थे, लेकिन भाजपा के साथ हाथ मिलाने के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया और जंयत पाटिल को बनाया। यदि विधायक अपने अध्यक्ष का व्हीप नहीं मानते हैं तो उन्हें अयोग्य भी ठहराया जा सकता है।संविधान विशेषज्ञ के मुताबिक, यदि अजित पवार और जयंत पाटिल दोनों व्हीप जारी करते हैं तो विधायक किसी का भी आदेश मान सकते हैं, लेकिन फ्लोर टेस्ट के बाद जिसके पास ज्यादा विधायक होंगे, उसका मत माना जाएगा। फिर स्पीकर तय करेगा कि बाकी बचे विधायकों का क्या करना है।सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट के लिए 5 बजे का समय तय किया है, लेकिन ठीक 5 बजे फ्लोर टेस्ट शुरू नहीं होगा। 5 बजे से बहस शुरू होगी। सभी पक्षों के नेता अपनी-अपनी बात रखेंगे, जिसके बाद ही वोटिंग होगी। इसमें कितना भी समय लग सकता है। इसके बाद ही स्पष्ट हो जाएगा कि देवेंद्र फडणीस सरकार बनी रहेगी या गिर जाएगी।