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Submitted by Dr DS Sandhu on

 अशोकनगर: स्वीट सुपारी यू मी के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध लगाये जाने हेतु कमिश्नर, खाद्य सुरक्षा प्रशासन, राजस्थान को लिखा पत्र।

   खाद्य सुरक्षा प्रशासन अशोकनगर के द्वारा जिले मे बडी कार्यवाही करते हुये आयुक्त, खाद्य सुरक्षा प्रशासन, जयपुर, राजस्थान को असुरक्षित पाये गये खाद्य पदार्थ स्वीट सुपारी यू मी के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध लगाये जाने हेतु खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 34 के अंतर्गत कार्यवाही किये जाने के लिए जांच प्रमाण पत्र की प्रति सहित आवेदन प्रेषित किया गया है।  इस संबंध में आयुक्त, खाद्य सुरक्षा प्रशासन, भोपाल म.प्र. को भी मध्यप्रदेश में स्वीट सुपारी यू मी के विक्रय पर प्रतिबंध लगाये जाने हेतु आवेदन प्रेषित किया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी, लीना नायक द्वारा आशिक किराना, तकिया मोहल्ला पिपरई से स्वीट सुपारी यू मी का नमूना जांच हेतु लिया गया था। उक्त नमूना चौकसी लेबोरेटरीज, इंदौर से मानक स्तर का होना पाये जाने पर रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण होने की आशंका पर अभिहित अधिकारी द्वारा पुनः जांच हेतु निर्दिष्ट प्रयोगशाला मैसूर भेजा गया था, जहां से स्वीट सुपारी यू मी का नमूना असुरक्षित होना पाया गया था। इसके पश्चात पुनः खाद्य सुरक्षा अधिकारी, लीना नायक के द्वारा दिनांक 22.01.2025 को जगदीश किराना भंडार, शाढौरा से स्वीट सुपारी यू मी का नमूना जांच हेतु लिया गया था । पायस लेबोरेटरीज, इंदौर द्वारा उक्त नमूना मानक स्तर का पाये जाने पर फिर से अभिहित अधिकारी द्वारा पुनः जांच हेतु नमूना निर्दिष्ट खाद्य प्रयोगशाला मैसूर भेजा गया था। जहां से पुनः स्वीट सुपारी यू मी का नमूना मिथ्या छाप तथा असुरक्षित होना पाया गया। स्वीट सुपारी यू मी के बार बार असुरक्षित पाये जाने के कारण अभिहित अधिकारी द्वारा इसकी निर्माता फर्म एल आर फ्रेगरेंस, कोटा, राजस्थान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 34 के अंतर्गत विक्रय प्रतिषेध की कार्यवाही किये जाने का अनुरोध आयुक्त खाद्य सुरक्षा प्रशासन, राजस्थान तथा मध्यप्रदेश से किया गया है।

शहर में अमानक खाद्य पदार्थों की भरमार :अक्सर देखा जाता है कि शहर में अमानक खाद्य पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। जिसमें तरह तरह के अखाद्य रंगों की मिठाइयां,नकली मावा - पनीर की भरमार हुई पड़ी है। वहीं चाट, पकौड़ी, समोसा कचोड़ी, को बार कितने ही दिन तक घटिया तेल में तला जाना आम बात है। जिससे नागरिकों को पेट से संबंधित अनेकों तकलीफों से ग्रस्त होना, पीलिया- पांड़ुल एवं टाइफाइड होने की दर में वृद्धि पाई जा रही है। 

नागरिकों के स्वास्थ्य की अनदेखी: शहर में सर्दी के मौसम शुरू होते ही कुकरमुत्ते की तरह गजक की दुकानें तथा गजक के ठेले ऊग आये हैं जिन पर किसी प्रकार का खाद्यान्न बिक्री करने का लायसेंस नहीं है । ऊपर से इसको बनाने में स्वच्छता का पूरी तरह उलंघन हो रहा है ।खुले में  धूल मिट्टी मिली सामग्री बिक्री करते हुए नागरिकों के स्वास्थ्य तथा जेबों की लूट हो रही है।

पर्याप्त सुविधाओं का अभाव: खाद्य सुरक्षा अधिकारी लीना नायक संसाधनों के अभाव अकेली जब तक जॉच करने तथा नमूना लेने बाज़ार में पहुंचतीं है, तब तक  मिलावट खोर दुकानदार अपने संस्थान बंद कर रफूचक्कर हो जाते हैं। अतः जिला प्रशासन को चाहिए कि वह खाद्य सुरक्षा अधिकारी को पर्याप्त सुविधाएं तथा पुलिस बल की व्यवस्था अविलंब करें , जिससे अनैतिक तरीके से धन कमाने वाले इन नकली खाद्य पदार्थों और मिलावट खोरों द्वारा नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने पर अंकुश लगाया जा सके।