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Submitted by Dr DS Sandhu on

मेलियोइडोसिस का बढ़ता खतरनाक संक्रमण ! -डॉ.डी.एस.संधु

अशोकनगर:  आज थोड़े अंतराल पश्चात अपने साथी राजेश दुबे के संस्थान पर जाना हुआ जहां वो तो नहीं मिले अलबत्ता वहां काम कर रहे लोगों से जानकारी मिली कि उनके बहनोई साहब की तबियत खराब हो ने के कारण वो बाहर गये हैं । फोन से संपर्क होने पर उन्होंने जो स्वास्थ्य समस्या बताई वो निश्चित ही चिंता जनक कहीं जा सकती है। क्योंकि इस समय मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस नामक खतरनाक संक्रमण हाल ही में सक्रिय हुआ है, जो एक “वायरस” नहीं बल्कि एक गंभीर बैक्टीरिया-जनित बीमारी है।

यह 'Burkholderia pseudomallei'  नामक बैक्टीरिया के कारण होती है, जो यह एक ग्राम-नेगेटिव, छड़ी जैसे आकार वाला (rod-shaped) बैक्टीरिया होता है, जो धूल, मिट्टी और पानी में पाया जाता है। इसका माइक्रोस्कोप में दिखने वाला विशेष रूप "सुरक्षा पिन" (safety pin) जैसा होता है क्योंकि यह धुंधले सिरे पर दो रंगों में रंगता है (bipolar staining)। यह बैक्टीरिया2-5 माइक्रोन लंबा तथा 0.4-0.8माइक्रोन चौड़ा होता है। माइक्रोस्कोप के नीचे इसका आकार छड़ी जैसा होता है और यह चलने में सक्षम होता है क्योंकि इसमें झिल्ली पर झंडे (flagella) होते हैं।कल्चर में यह बड़े, झुर्रियों वाले, गहरे रंग के और कभी-कभी चिकने कॉलोनियों के रूप में उगता है।यह विशेष कर प्रदूषित मिट्टी और पानी में पाया जाता है। विशेषकर धान की खेती वाले क्षेत्रों में। यह बीमारी मुख्य रूप से खेत में काम करने वाले किसानों तथा अधिकांश समय गीली मिट्टी में रहने वालों को प्रभावित करती है।

 

इसकी स्थिति और गंभीरता:-

सितंबर 2025 तक, मध्य प्रदेश के 20 से भीअधिक ज़िलों में लगभग 150 इसके मामले संज्ञान आ चुके हैं। यह गम्भीर संक्रमण ग्रामीण और नगरीय दोनों ही क्षेत्रों में अपना दुष्रप्रभाव दिखाता नजर आ रहा है। यदि समय रहते इलाज मिलने में देरी होती  है तो हर तीसरे-चौथे मरीज की जान तक जाने का अंदेशा हो सकता है।

महत्वपूर्ण  लक्षण एवं खतरे:

इसके महत्व पूर्ण लक्षण जो देखने आ रहे हैं वो इस प्रकार हैं जैसे कि लगातार बुखार, त्वचा पर चकत्ते या घाव, लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, भ्रम या न्यूरोलॉजिकल लक्षण। टीबी के लक्षणों से मिलती-जुलती बीमारी होने के कारण अक्सर गलत या देर से डायग्नोसिस हो पाना भी गम्भीर समस्या का कारण है।सर्वाधिक खतरा: मधुमेह यानि डायबिटीज़, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग, अधिक शराब सेवन करने वालों को इस बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक होता है। 

रोकथाम केलिए जरूरी कार्रवाई:

यह अत्यंत आवश्यक है कि सीधे सीधे मिट्टी तथा गंदे पानी से सीधे संपर्क में आने से बचें, तथा दस्ताने-गमबूट पहनें, एवं व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।किसी भी संदिग्ध लक्षण नजर आने पर तुरंत अच्छे तथा अनुभवी चिकित्सक से जांच करवाएं।

वैसे इस गम्भीर संक्रमण बीमारी से लोगों को बचाने प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को सतर्क कर दिया है और  सभी किसानों के लिए मुफ्त इलाज एवं स्वास्थ्य शिविर की घोषणा की है।                            मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस नामक बैक्टीरियल बीमारी गंभीर रूप से सक्रिय है, और सतर्कता, जल्दी जांच तथा इलाज इससे बचाव के लिए यह आवश्यक कदम हैं। मेलियोडोसिस के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, छाती या सांस में तकलीफ, घाव या फोड़े, और लंबे समय तक वजन घटना शामिल हैं। इससे ग्रसित कुछ मरीजों को जोड़ों में दर्द, त्वचा पर अल्सर, भ्रम या निमोनिया जैसे भी लक्षण महसूस हो सकते हैं।

मेलियोडोसिस के मुख्य लक्षण

तेज बुखार और ठंड लगना,लंबे समय तक खांसी, जिसमें बलगम आ सकता है।छाती में दर्द और सांस लेने में परेशानी होना,शरीर के अलग-अलग अंगों में फोड़े या घाव बनना वजन में अचानक कमी पेशियों और जोड़ों में दर्द गंभीर मामलों में सेप्सिस (रक्त संक्रमण) और अंग फेल होना त्वचा पर छोटे-छोटे अल्सर या न भरने वाले घाव।

रोकथाम के उपाय: खेत या मिट्टी में काम करते समय हमेशा दस्ताने, गमबूट और सुरक्षात्मक कपड़े पहनें,चोट, घाव, या कट को हमेशा साफ और ढका हुआ रखें, पीने के लिए उबला या बोतलबंद पानी ही इस्तेमाल करें, खासकर बारिश या बाढ़ के बाद खेत या मिट्टी में अनावश्यक रूप से न घूमें, खासकर संक्रमित क्षेत्रों में हाथ और त्वचा की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखेंडायबिटीज़, किडनी या लीवर की बीमारी वाले लोग विशेष सतर्कता बरतें क्योंकि इस मेलियोडोसिस बीमारी की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए रोकथाम और सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण हैं।मेलियोडोसिस के संपर्क में आने से बचने के लिए मुख्य रूप से मिट्टी और गंदे पानी से जितना हो सके दूरी बनाएं,   खासकर यदि घाव या त्वचा में कट हो, या यदि मधुमेह, किडनी या इम्यूनिटी से जुड़ी बीमारी है। संपर्क से बचने के तरीके धान, खेत या गीली मिट्टी में काम करते दौरान वाटरप्रूफ दस्ताने और गमबूट पहनें।

शरीर पर किसी भी खुले घाव या कट को अच्छी तरह से ढककर रखें, जिससे बैक्टीरिया भीतर न जा सके।

मिट्टी या पानी के सीधे संपर्क से बचें, विशेषकर संक्रमित क्षेत्रों में।बारिश या बाढ़ के मौसम में अतिरिक्त ध्यान दें और संभव हो तो धान/कीचड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।पीने के लिए सिर्फ स्वच्छ, उबला या बोतलबंद पानी चयनित करें।व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, बाहर से आने के बाद हाथ और पैर साबुन से धोना न भूलें। इन सावधानियों से मेलियोडोसिस के जोखिम को बहुत कुछ कम किया जा सकता है।

मेलियोडोसिस का प्रभावी इलाज:

 इसका इलाज दो चरणों में किया जाता है, जिसमें एंटीबायोटिक दवाओं का व्यापक उपयोग होता है। पहले चरण में तीव्र (acute) संक्रमण के लिए अंतःशिरा (IV) एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं, और दूसरे चरण में मौखिक (oral) एंटीबायोटिक्स के साथ दीर्घकालीन उपचार होता है।

इलाज के प्रमुख चरण:

तीव्र चरण (10-14 दिन तक):

इसमें मुख्यत: अंतःशिरा सेफ्टाजिडाइम (Ceftazidime) दिया जाता है, जो हर 6-8 घंटे में लगाया जाता है। इसके अलावा इमीपेनेम, मेरोपेनेम या सेफेरोपाज़ोन-सल्बैक्टम भी विकल्प हो सकते हैं। यह चरण संक्रमण को तीव्रता से कम करने में मदद करता है।

उन्मूलन चरण (3-6 महीने):

गंभीर संक्रमण के बाद रोगाणु को पूरी तरह खत्म करने के लिए लंबे समय तक मौखिक एंटीबायोटिक्स जैसे सल्फामेथोक्साजोल-ट्राइमेथोप्रिम (TMP-SMX) और डॉक्सीसाइक्लिन (Doxycycline) दी जाती हैं। यह चरण बीमारी के पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आवश्यक है।

अन्य उपचार: गंभीर मामलों में जहां फेफड़े, प्रोस्टेट या अन्य अंग संक्रमित हों, सर्जिकल उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।रोगी के लक्षण और संक्रमण की गंभीरता के अनुसार उपचार अवधि में बदलाव संभव है।

उपचार की सफलता:-

यदि दवाएं पूरा और सही समय तक ली जाती हैं तो बीमारी से पूरी तरह ठीक होना संभव है। किन्तु इलाज बीच में रोकने से संक्रमण वापस आ सकता है एवं जटिलताएं भी हो सकती हैं। यह महत्वपूर्ण रूप से ध्यान देने वाली बात है कि मेलियो डोसिस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए उचित इलाज और बिना  घबराए सावधानी बनाएं रखना अत्यंत आवश्यक है।

 

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