भिड़ जाओ मुश्किलों से
(कविता)
-डाॅ.वंदना ठाकुर "चहक"
भिड़ जाओ मुश्किलों से,
यही वक्त की पुकार है,
हर अंधेरे के बाद ही उजाले की बहार है।
डर के साए से बाहर निकलना सीखो,
हौसलों में ही छुपी जीत की धार है।
गिरोगे तो संभलना भी तुम ही सीखोगे,
ठोकरों में ही आगे बढ़ने का सार है।
रास्ते रुकते नहीं किसी के रुक जाने से,
चलने वालों के लिए हर राह तैयार है।
आंधियाँ रोक नहीं पातीं पर्वत की जिद को,
दृढ़ इरादों में ही सच्ची तलवार है।
पसीने की हर बूंद कहानी लिखती है,
मेहनत ही असली भाग्य का आधार है।
हार को भी मुस्कुराकर गले लगाओ,
इसी में छुपा जीत का उपहार है।
भिड़ जाओ मुश्किलों से पूरे विश्वास के साथ,
सपनों का बस इतना सा अधिकार है।
जो खुद पर भरोसा रखना जान गया,
उसके कदमों में सारा संसार है।
होशियारपुर (पंजाब)